महात्मा गांधी द्वारा लगाए पेड़ पर फैल रही हैं बीमारी

देहरादून– मोहनदास करमचंद गांधी द्वारा शहंशाही के पास मसीही ध्यान केंद्र मैं 17 oct 1929 में एक पीपल का पौधा लगाया था जोकि अब लगभग 89 साल का पेड़ हो गया हैं, महात्मा गांधी द्वारा लगाए इस पेड़ में अब कुछ बीमारी पैदा हो गई है जिस के कारण पीपल के वृक्ष में संकट पैदा हो रहा हैं ,
वन्य प्रेमी ने इसकी शिकायत तीन दिन  पहले  WhatsApp के द्वारा प्रमुख वन संरक्षक जयराज से की थी, सूचना मिलने पर वन विभाग ने वहां जाकर पेड़ की कुछ फोटो खीचें व वहां के माली रामजस से बातचीत की और ट्रीटमेंट की बात कहकर वापस आ गए, जब हमें इस बारे में पता चला तो हम मसीही ध्यान केंद्र में पहुंचे और वहां की मैनेजर सरिता दास से बातचीत की तो उन्होंने हमें बताया कि हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कुछ लोग आज यहां पर अपना कार्यक्रम कर रहे थे तो वन प्रमुख आए और उनसे बात करके चले गए मगर इसके बारे में ज्यादा जानकारी  आपको हमारे माली ही दे सकता है और उन्होंने हमें अपने मालिक से मिलवाया तब हमने माली रामजस से वार्तालाप की और उनसे पूछा तो उन्होंने इस पेड़ के बारे में बताया और कहा कि मैं 31 सालों से इस पेड़ की देखरेख कर रहा हूं उस समय में जवान था तो
 पीपल के पेड़ पर बंधा दे दिया करता था यानी कि उसकी कटाई छटाई करता था लेकिन अब मैं बूढ़ा हो चला हूं तो इस वजह से पेड़ पर चढ़ कर इसकी कटाई चटाई नहीं कर सकता हूं,और पेड़ को बंधा देना बहुत जरूरी है  यह उसी प्रकार से है जैसे मनुष्य को कैंसर हो जाता है तो उसका शरीर धीरे-धीरे खत्म होता है उसी प्रकार से अगर पेड़ को बंधा नहीं दिया गया तो पेड़ में चारों तरफ जाला लग जाएगा और पेट धीरे-धीरे सूखने लगेगा और मुझे इसका बहुत दुख होगा उन्होंने हमें पेड़ की सूखी हुई पतिया को दिखाते हुए बताया कि यह वह बीमारी है जो पेड़ को धीरे-धीरे अपनी जकड़ में ले लेती है और जब पेड़ पर हर सील बंधा लग जाता है तो पेड़ में नई पतिया आ जाती हैं तो पेड़ खिल जाता हैं,

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