गोबर से बने गमलों का इस्तेमाल करने में आसान- केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी

 नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड सदन में केन्द्रीय मंत्री  मेनका गांधी  ने मुख्यमंत्री से राज्यहित से सम्बन्धित मुद्दों पर चर्चा की और कहा कि “उत्तराखण्ड गोवंश अधिनियम, 2007” में कुछ कानूनी प्रावधान सम्मिलित होने सेे वंचित रहे गये है। इसके लिये कानूनी प्रावधान में आवश्यक संशोधन करते हुये उत्तराखण्ड के गोवंश संरक्षण अधिनियम को देश को सर्वाधिक गोवंश संरक्षण अधिनियम बनाने का अनुरोध किया।
 मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर विधि विशेषज्ञों से पूर्ण परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी गौशालाओं में उपलब्ध गोबर से गमले बनाया जा रहे है। इन गमलों का उपयोग छोटे पौधों को सीधे जमीन में रोपने से पौधा खराब नहीं होता है क्योंकि वन विभाग द्वारा छोटे पौधों को काले प्लास्टिक की थैलियों सहित रोप दिया जाता है।
 गोबर से बने गमलों का इस्तेमाल करने में आसान होगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य के आंगनवाडी केन्द्रों में 3 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों में कुपोषण एवं रक्तल्पता की कमी को रोकने के लिये प्रत्येकआंगनवाड़ी केन्द्रों में तीन माह तक हर बच्चें को 30 आर यू टी एफ के पैकेट घर में उपलब्ध कराये जाये उन्होंनें बताया कि इस आहार को स्थानीय मोटा अनाज जैसे मंडवा रागी, चोलाई, बाजरा, सोयाबीन से बनाया जाता हैं इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन की मात्रा बहुत अधिक होती है, कुपोषण को दूर करने के लिये इन अनाजों की आवश्यकता मांग बढ़ने से पहाड़ी अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पडे़गा। केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से कहा कि आर यू टी एफ(READY-TO-USE THERAPEUTIC FOOD) को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा कुपोषित बच्चों के लिये स्पेशल मिशन के तौर पर शीघ्र लागू किया जाये।

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