RIP शब्द का इस्तेमाल मृत्यात्मा के लिए ना करें

देहरादून–जब भी किसी की मृत्यु हो जाती है तो लोग अपनी संवेदनाएं प्रकट करने के लिए रेस्ट इन पीस लिख देते हैं। या इसे ( RIP) रिप शॉर्ट फॉर्म में भी लिख दिया जाता है। जबकि इसका मतलब है "शांति से आराम करो"  और इसका उपयोग जिन्हें कब्र में दफनाया गया हो  उसके लिए किया जाता है।क्योंकि ईसाई, यहूदी,  मुस्लिम समाज में दफनाने का रिवाज हैं। ईसाई, यहूदी अथवा इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार जब कभी "जजमेंट डे" या "कयामत का दिन" आएगा उस दिन कब्र में पड़े यह सभी मृतक व्यक्ति पुनर्जीवित हो जायेंगे।
अक्सर आपने कई हिंदी फिल्मों में "कयामत का दिन" आएगा का शब्द सुना होगा। इसलिए वह रेस्ट इन पीस कहते हुए मृतक शरीर को कब्र में दफनाया जाता हैं। यह ग्रीक पौराणिक कथाओं और इससे पहले मिस्र की कथाओं में ममी शब्द भी सुना  होगा। जबकि हिंदुओं में मृतक के शरीर का अग्निदाह संस्कार किया जाता हैं। शरीर जल जाता है और आत्मा नश्वर हैं। इसलिए हिंदुओं में रेस्ट इन पीस शब्द का कहीं  जिक्र नहीं होता है
हमेशा हम मृतक आत्मा के लिए "ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें" या अन्य दूसरे शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं। वही प्राचीन मिस्र में मृत्यु के बाद की दिशा पश्चिम होती थी, ईसाई धर्म में वह पूर्व हो गई जो कि सूर्य के उगने की दिशा है। यहूदी धर्म में यह दिशा यरूशलम की तरफ होती है तो इस्लाम में मक्का की ओर। हिन्दू ताबूत की दिशा को दक्षिण में रखते हैं। क्योंकि यही वैतरणी की दिशा मानी जाती है जिसके पार मृतकों की भूमि पितृलोक या यमलोक है जहां से हर कोई आखिरकर लौटता है। जो बुद्धिमान हैं। वे कभी इस तरफ नहीं जाते। बौद्ध धर्म में उनकी मृत्यु निश्चित है।यहां प्राकृतिक सचाई को स्वीकार करना कठिन रहा है।रेस्ट इन पीस शब्द का इस्तेमाल हिंदुओं के मृत्यु के बाद मृत्यात्मा के लिए प्रार्थना के रूप में ना करें उनके लिए अपने ही शब्द "ओम शांति ओम" "ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें" या "विनम्र श्रद्धांजलि" "श्रद्धांजलि" "मृत्यु आत्मा को सद्गति की प्राप्त हो" जैसे शब्द का ही इस्तेमाल करें यह शब्द से केवल और केवल ईसाई, यहूदी, और मुस्लिम लोगों के लिए ही इस्तेमाल किया जाए।

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