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स्थायी राजधानी के लिए पहाड़ हुआ लामबंद

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देहरादून –स्थायी राजधानी गैरसैंण समेत उत्तराखंड के मूलभूत सवालों को लेकर पंचेश्वर से उत्तरकाशी तक की जन संवाद यात्रा ने प्रदेश में बड़े जनांदोलन की जमीन तैयार कर दी है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए प्रदेश में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इसके लिए पूरा पहाड़ एकजुट हो रहा है और 25 दिसंबर को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की जयंती पर बड़ी रैली की जाएगी। स्थायी राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के तत्वावधान में की गई जन संवाद यात्रा के संयोजक चारु तिवारी ने देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा की 10 अक्टूबर को पंचेश्वर (चंपावत) से शुरू हुई यात्रा लगभग 2200 किलोमीटर की हुई इस लम्बी यात्रा में पहाड़ के सभी दस पर्वतीय जिलों में पचास से ज़्यादा छोटी-बड़ी सभाएं आयोजित की गईं। संवाद यात्रा पंचेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, झूलाघाट, पिथौरागढ़, डीडीहाट, गंगोलीहाट, बागेश्वर, बैजनाथ, अल्मोड़ा, नैनीताल, रामनगर, मरचूला, धूमाकोट, मौल्याखाल, भिकियासैंण , द्वारहाट , चौखुटिया, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, घाट, गोपेश्वर, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, तिलवाड़ा, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, श्रीनगर, टिहरी, चंबा होते हुए  25 अ...

कांग्रेस का सीबीआई कार्यालय देहरादून में प्रदर्शन

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देहरादून–उत्तराखण्ड  प्रदेंश कांग्रेस कमेटी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पीसीसी अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक आलोक वर्मा को केन्द्र सरकार द्वारा असंवैधानिक एवं गैरकानूनी तरीके से जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के विरोध में सीबीआई कार्यालय देहरादून में प्रदर्शन किया। और दून  सीबीआई शाखा प्रमुख अखिल कौशिक के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन  प्रेषित किया जिसमें  कांग्रेस पार्टी ने मांग की कि केन्द्र सरकार द्वारा आनन-फानन में लिए गए इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए, सीबीआई निदेशक वर्मा को पुर्न स्थापित किया जाए, अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने   प्रदर्शन में उपस्थिति कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए  प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा शासन में जिस प्रकार सी0बी0आई0, ई0डी0, सी0वी0सी0, यू0पी0एस0सी0 जैसे संवैधानिक संस्थाओं का अपने हित में दुरूपयोग किया जा रहा है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। इस प्रकरण से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय न्याय व्यवस्था प्रणाली की बदनामी हो रही है। सभी संवैधानिक संस्थाओं का भाजपा के शासन में लगातार पतन ह...

गौरा देवी के जन्म दिवस पर शत् शत् नमन

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देहरादून– गौरा देवी का जन्म 25 अक्टूबर 1925  में उत्तराखंड के चमोली जिले के लाता गाँव में हुआ था. इन्होने 5वीं तक शिक्षा ग्रहण की हैं. इनका विवाह मेहरबान सिंह से हुआ था. ये लोग जीवनयापन करने के लिए पशुपालन, ऊनी कारोबार और खेती किया करते थे. जीविका चलाने के लिए इन्हें तमाम तरह के कष्टों को सहना पड़ता था.अलकनंदा में 1970 में प्रलयकारी बाढ़ आई, जिससे यहाँ के स्थानीय लोगों में बाढ़ को रोकने के प्रति जागरूकता बढ़ी और इस कार्य के लिये चण्डी प्रसाद भट्ट ने पहल की. भारत-चीन युद्ध के बाद भारत सरकार को चमोली की सुध आई और यहाँ पर सैनिकों के लिए सुगम मार्ग बनाने के लिए पेड़ों की कटाई की शुरूआत हुई. बाढ़ से प्रभावित लोग के हृदय में पेड़ों और पहाड़ो के प्रति संवेदना जागी और महिला मंगल दलों की स्थापना हुई. 1972 में गौरा देवी को रैणी गाँव की “महिला मंगल दल”का अध्यक्ष चुना गया और धीरे-धीरे हर गाँव में महिला मगल दलों की स्थापना हुई और महिलाओं ने इसमें अपना भरपूर सहयोग दिया. पेड़ो को बचाने के लिए महिलाओं ने अपनी जान की परवाह किये बिना वो ठेकेदारों से लड़ जाती थी और उन्हें बन्दूक के द्वारा धमकी और अन्य कई अ...

राजनीति की भेंट चढ़ता एनआईटी

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श्रीनगर गढ़वाल– उत्तराखंड में 2013 की आपदा के बाद श्रीनगर में बने एनआईटी परिसर का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है अस्थाई रूप से पॉलिटेक्निक कॉलेज में  बने एनआईटी अपने भविष्य के लिए चिंतित हैं  वही काफी दिनों से चल रहे छात्रों का आंदोलन एकाएक नए मोड़ पर आ गया छात्रों ने कॉलेज के छात्रावास में तालाबंदी कर कॉलेज छोड़कर  अपने अपने घरों को निकल पड़े छात्रों की मांग है कि उन्हें स्थाई परिसर दिया जाए वही श्रीनगर  एनआईटी को लेकर राजनीति भी हो रही है राज्य सरकार इस मसले का अभी तक समाधान नहीं निकाल पाई है  जहां एनआईटी को  लगभग 300 एकड़ भूमि की आवश्यकता है  वहीं सरकार अभी तक इन्हें भूमि मुहैया नहीं करा पा रही है सुमाड़ी में  आवंटित की भूमि  पर एनआईटी  का निर्माण होने से पहले ही विवाद हो गया  उसके बाद एक अन्य जगह  पर जमीन चिन्हित की गई मगर वह जमीन  केंपस  के हिसाब से काफी नहीं थी इसी कारण  छात्रों को अभी तक अलग-अलग जगह रहना पड़ रहा था और एक कमरे में छः छः छात्र रह रहे थे  जोकि रहने के लायक नहींनहीं हैं,एन आई टी छोड...

आधुनिक शोध भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित हो

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देहरादून–दून विश्वविद्यालय के प्रबन्धशास़्त्र विभाग द्वारा शोध छात्रों के लिये आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए दून विश्वविद्यालय के कुलपति डा0 चन्द्रशेखर नौटियाल ने कहा कि भविष्य के पूर्वानुमान व आगणन के लिये शोध प्रविधि का चयन शोधार्थियों के लिये महत्वपूर्ण कदम है।यदि पूर्वानुमान सटीक व सही समय पर हो तो मानव कल्याण एवं सामाजिक उत्थान के कार्यक्रम कारगर तरीके से नियोजित एवं संचालित किये जा सकते हैं। शोध का विषय मात्र उपाधि प्राप्त करने तक ही सीमित नहीं होना चाहिये यह जीवन पर्यन्त चलने वाला विषय है। इसलिये इस तरह के कार्यशालाओं से सीखी हुई तकनीक ताउम्र व्यक्ति को जीवन के पथ पर अग्रसर करने में सहायक होती है। विशिष्ट अतिथि गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रबन्धशास़्त्र के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो0एस सी धमीजा ने कहा कि आधुनिक शोध में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश होना चाहिये। आज के वैश्विक परिवेश में पश्चिमी देशों के आधार पर विकसित माॅडल भारतीय समाज में सत प्रतिशत कारगर होंगे यह सत्य नहीं है। इसलिये हमें वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप भारतीय ज्...

बाजारों में भी बने शौचालय–धाद

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देहरादून– उत्तराखंड में  होने वाले नगर निगम और नगर निकाय चुनाव से पहले महिला सुरक्षा की विभिन्न मांगों को लेकर और नगर निकाय चुनाव के अपने घोषणा पत्र में  सभी दल इसे भी एक एजेंडे के तेहत शामिल करे इसी मांग को लेकर धाद महिला सभा ने आज प्रेस वार्ता का आयोजन किया. प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए महिला सभा की संयोजिका डॉ मधु थपलियाल ने कहा की महिला हिंसा और महिला सुरक्षा का मुद्दा हमेशा समाज के सामने एक बड़ा सवाल रहा है इसलिए इसे कई स्तरों पर हल किये जाने की जरूरत है. वहीं उन्होंने यह भी बताया कि व्यावसायिक संस्थाओं में काम करने वाली लड़कियों को  किस प्रकार से  शौच जाने के लिए  कई कई घंटों तक  इंतजार करना पड़ता है  क्योंकि  इन जगहों पर शौचालय नहीं होते है, जिसके कारण यह शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं  और अगर प्रेशर को ज्यादा देर तक रोके रखोगे तो इससे बीमारी  होने का भी खतरा बना रहता है ,केंद्र और प्रदेश सरकार के पश्चात जो तीसरी सरकार है वो नगर निकाय और पंचायतें है. गत कुछ वर्षों शहरीकरण के चलते चुनौतियाँ  बड़ी हुई है निरंतर बढ़ती ...

निर्दलीय उम्मीदवार जगमोहन मेंदीरत्ता अब जनता के द्वार

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देहरादून–मेयर पद के लिए नामांकन पर जाने से पूर्व कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक पर उत्तराखंड के अमर शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देकर आशीर्वाद प्राप्त करते हुए निर्दलीय समाज सेवी जगमोहन मेंदीरत्ता व उनको समर्थन देने वाले समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधि बिना किसी दिखावे घोड़े - गाड़ी , और ढोल बाजे के अपने उम्मीदवार को सादगी से नामांकन के लिए ले जाते हुए जिस प्रकार बिना दलबल के बिना पैसे की भीड़ जुटाए शहर के सिर्फ उन जाने माने सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ जाकर मेयर पद के लिए नामांकन किया है वह पूरे शहर में  व विपक्षी दलों में भी चर्चा  का विषय बना हुआ है । ऐसे सादगी वाले मेयर प्रत्यासी को सभी समाजिक और ट्रेड संगठनों की ओर से संयुक्त कामयाबी और अपने पद पर विजय प्राप्त करने के आशीर्वाद दिया।संयुक्त रूप से समर्थित मेयर के निर्दलीय उम्मीदवार  जगमोहन मेहंदीरत्ता सुबह 11-बजे अपने समर्थकों के साथ शहीद स्मारक से शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उपरान्त नामांकन हेतु जलूस के साथ समर्थकों द्वारा नारे लगाते हुये शहर का मेयर कैसा हो जगमोहन भाई जैसा हो के नारों के साथ नगर...